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एमईसीएल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस संपन्न


‘‘योग स्वयं की यात्रा है, स्वयं के माध्यम से और स्वयं के लिए’’ - भगवद् गीता

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए 21 जून, 2016 को पूर्वाह्न 8.00 बजे एमईसीएल का पूरा परिवार अच्छे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, दीर्घजीविता के प्रति समर्पित समन्वित सुबह और अध्यात्म को एक में जोड़ने हेतु अपने-आप यूटिलिटी काॅम्पलेक्स में एकत्रित हुआ। एमईसीएल अपने कर्मचारियों की भलाई और सुख के बारे में सदैव चिंता करता रहा है। एमईसीएल हमारे भारतीय मूल्यों और प्राचीन संस्कृति के समतुल्य है। योग सदैव सभी स्वास्थ्य समस्याओं तथा संक्रमित बीमारियों, जिसमें कैंसर भी शामिल है, के सफल निदान में लाभकारी प्रमाणित हुआ है। योग उपापचय में वृद््धि, वजन घटाने, मांसपेशियों की शक्ति को सुधारने, लचीनेपन और भाव-भंगिमा को बढ़ाने में मदद करता है। इस प्रकार एमईसीएल वालों के साथ आने और पूर्ण उत्साह के साथ इस अवसर पर भाग लेने का निश्चय किया। यह समारोह दीप प्रज्वलन और योग गुरू श्री जनार्दन स्वामी जी महाराज की फोटो को मुख्य अतिथि डाॅ. गोपाल धवन, सीएमडी, एमईसीएल और श्री एमएसएन मूर्ति, निदेशक (वित्त) द्वारा माल्यार्पण करने के साथ प्रारंभ हुआ। तब श्री ओ.आर. ताले ने योग करने के लिए सबको निर्देश देने हेतु मंच संभाला। उन्होंने सबसे पहले योग मंच और श्वसन अभ्यास के साथ प्रारंभ किया जिससे शरीर के प्रत्येक भाग में श्वास पहंुचे। उसके पश्चात कुछ प्रमुख महत्वपूर्ण योगासनों का अभ्यास कराया गया। समारोह का पूरा परिवेश उर्जा और शांति से सराबोर हो गया। योगाभ्यास पुनः योग मंत्र के साथ समाप्त हुआ। इसके बाद समारोह के मुख्य अतिथि डाॅ. गोपाल धवन ने सभी को योगाभ्यास करने के फायदों और विभिन्न लाभों के बारे में समझाया और एमईसीएल सदस्यों को अपने दैनिक जीवन का कुछ समय योगाभ्यास करने के लिए समर्पित करने पर बल दिया। समारोह स्वास्थ्यप्रद नाश्ते जिसमें पौष्टिक अन्न और फल शामिल थे, के वितरण के साथ संपन्न हुआ।

योगाभ्यास प्रारंभ में बहुत थकाऊ लग सकता है और मांसपेशियों में अपेक्षित लचक की जरूरत के कारण कहने को असंभव लगता है। कठोर शरीर वालों के लिए नए-नए में योग प्रारंभ करना थोड़ा कष्टदायक भी लगता है परंतु मुख्य कार्य तब शुरू होता है जब आपको राहत महसूस होने लगती है। इसे चुनौती के रूप में ग्रहण करते हुए हमे धैर्य और निष्ठा के साथ प्रत्येक चरण का पालन करना चाहिए। इस तरीके से अपनी कठिनाईयों का सामना करके आप शक्ति प्राप्त करते है और आपको स्वयं अपनी क्षमता पर विश्वास करना प्रारंभ होता है और आप बेहतर लक्ष्य की ओर बढ़ते है। आसनों का अध्ययन केवल मुद्राओं में पारंगत होना नहीं है अपितु वह स्वयं को समझना और बदलने के लिए है।

श्री ओ.आर. ताले, वरि. प्रबंधक (प्रणाली) नियमिल रूप से हमारे परिसर में सायं 5.30 से 6.30 बजे तक कक्षाएं ले रहे है। मैक समाचार अपने प्रत्येक कर्मचारियों का इन कक्षाओं से भारी संख्या में लाभ उठाने का अनुरोध करता है जिसके लिए कोई शुल्क नहीं है।


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